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यूपी में बाढ़ से 20 जिलों की करीब छह लाख जनसंख्या प्रभावित

यूपी में बाढ़ से 20 जिलों की करीब छह लाख जनसंख्या प्रभावित

लखनऊ (डीएनएन)।   11 Aug 2020      Email  

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि राज्य में सामान्य से 10.4 प्रतिशत कम बारिश के बावजूद 20 जिलों की करीब छह लाख जनसंख्या बाढ़ से प्रभावित है। योगी ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में कहा कि राज्य में बाढ़ से 20 जिले में 5,75,094 जनसंख्या प्रभावित है। बाढ़ से 38,248 हेक्टेयर कृषि फसल प्रभावित हुई है। प्रभावित कृषि क्षति का विस्तृत सर्वे कराया जा रहा है।  उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में एक जून से आठ अगस्त तक 400.5 मिली मीटर वर्षा हुई है, जो सामान्य से 10.4 प्रतिशत कम है। प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा के बावजूद पूर्वांचल के 15 जिलों में बाढ़ का प्रभाव है। नेपाल राष्ट्र एवं उत्तराखंड में सामान्य से लगभग 20 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है, जिससे चार नदियां घाघरा, राप्ती, शारदा एवं गंडक खतरे के निशान के ऊपर प्रवाहित हुई हैं। योगी ने कहा कि राज्य के 40 जिले संवेदनशील हैं, जिनमें प्रत्येक वर्ष लगभग 16 लाख हेक्टेयर भूमि तथा 70 लाख आबादी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश के 20 जिले अंबेडकर नगर, अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बलिया, बलरामपुर, बाराबंकी, बस्ती, देवरिया, गोंडा, गोखरपुर, खीरी, कुशीनगर, महाराजगंज, मऊ, पीलीभीत, प्रतापगढ़, संतकबीर नगर, सिद्धार्थनगर तथा सीतापुर बाढ़ से प्रभावित हैं। नदियों में अत्यधिक जलप्रवाह के कारण प्रदेश के तीन जिलों आजमगढ़, मऊ तथा गोंडा में तीन तटबंध क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनकी मरम्मत कर ली गई है। उन्होंने बताया कि बाढ़ से 1,04,562 परिवार तथा 76,723 पशु प्रभावित हुए हैं तथा 38,248 हेक्टेयर कृषि फसल प्रभावित हुई है। राज्य में 15 जुलाई के बाद बाढ़ के कारण 13 जनहानियां तथा 57 पशुहानियां हुई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बाढ़ बचाव कार्यों के लिए एनडीआरएफ की 15 टीमें, एसडीआरएफ की 9 टीमें तथा पीएसी की 17 बाढ़ कंपनियां बाढ़ खोज-बचाव के लिए तैनात हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंध प्राधिकरण के सहयोग से एक जुलाई को प्रदेश के 75 जिलों में बाढ़ की तैयारी के लिए मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। राहत आयुक्त कार्यालय में 24 घंटे सातों दिन एकीकृत आपदा नियंत्रण केंद्र तथा 1070 हेल्पलाइन का संचालन किया जा रहा है। इस वर्ष बाढ़ बचाव की 83 परियोजनाएं (लागत 856.62 करोड़ रुपए) अब तक पूर्ण की जा चुकी हैं तथा 318.47 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृतियां जारी की जा चुकी हैं। योगी ने कहा कि सभी तटबंधों को कोविड के बावजूद वर्षाकाल के पूर्व ही मरम्मत कराकर तैयार कर लिया गया है, फ्लड फाइटिंग के लिए स्टॉक की व्यवस्था कर ली गई है तथा बाढ़ चौकियों, वायरलेस केंद्रों एवं सभी संवेदनशील जिलों में बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना की जा चुकी है। प्रत्येक वर्ष नेपाल राष्ट्र की सीमा पर गंडक नदी पर बाढ़ परियोजनाएं केंद्र के वित्त पोषण से निर्मित की जाती हैं लेकिन इस वर्ष कोविड-19 के कारण नेपाल राष्ट्र के द्वारा अपने क्षेत्रों में बाढ़ परियोजनाओं के क्रियान्वयन की अनुमति प्रदान नहीं की गई। नेपाल राष्ट्र की भौगोलिक सीमा में स्वीकृत 11 नई परियोजनाएं, कुल लागत 53.64 करोड़ रुपए बाढ़ पूर्व क्रियान्वित नहीं की जा सकीं। उन्होंने कहा कि बाढ़ राहत के लिए 283 शरणालय स्थापित किए गए हैं। प्रभावित परिवारों को 90,493 फूड पैकेट, 40,456 राशन किट तथा 1.80 लाख मीटर तिरपाल का वितरण किया जा चुका है। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में सुगम आवागमन के लिए 1,248 नावों का संचालन किया जा रहा है। बाढ़ प्रभावित जिलों में 685 बाढ़ चौकियों की स्थापना कर बाढ़ की स्थिति का लगातार अनुश्रवण किया जा रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 253 मोबाइल मेडिकल टीमें गठित की गई हैं। बाढ़ से प्रभावित पशुओं के लिये 178 पशु शिविरों की स्थापना की गई है तथा अब तक लगभग छह लाख पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है।



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