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भारत में ‘समुद्री ज्ञान मंथन’ की व्यापक जरूरत: पर्रिकर

भारत में ‘समुद्री ज्ञान मंथन’ की व्यापक जरूरत: पर्रिकर

पणजी 07 नवंबर (वार्ता)  07 Nov 2017      Email  

पणजी 07 नवंबर  गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने भारत की अर्थव्यवस्था में समुद्री संसाधनों के महत्व को रेखांकित करते हुए आज कहा कि इस क्षेत्र में व्यापक स्तर पर शोध किये जाने की जरूरत है।

श्री पर्रिकर राष्ट्रीय समुद्रविज्ञान संस्थान (एनआईओ)में नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) एवं केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक मीडिया कार्यशाला के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
इस चार दिवसीय कार्यशाला में देश के विभिन्न हिस्सों से आये पत्रकार भाग ले रहे हैं।
उन्होंने कहा, “आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था में समुद्र विज्ञान की प्रमुख भूमिका होगी और इस दिशा में अधिक व्यापक रूप से काम किये जाने की जरूरत है।
श्री पर्रिकर ने कहा कि भारत का समुद्री क्षेत्र दो करोड़ वर्ग किलोमीटर है और इसमें असंख्य प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं जिनके दोहन से आर्थिक प्रगति एवं समृद्धि की नई इबारत लिखी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि इस तरह से इसमें शोध से देश की अर्थव्यवस्था में बड़े परिवर्तन लाये जा सकते हैं।
उन्होंने कहा“ प्रधानमंत्री नरेेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केन्द्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर) ने बड़े शोध किये है, जो इस संस्था के अध्यक्ष भी हैं, और पिछले कुछ समय में समुद्री शोध को काफी महत्व दिया गया है और विभिन्न तरह की तकनीक भी विकसित की गयी है।
भारत में मुख्य तौर पर समुद्री अर्थव्यवस्था के संभावना के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, “देश में करीब साढ़े सात हजार किलोमीटर लंबा समुद्र तटीय क्षेत्र है और इससे हमारे पास नयी संभावनाएं तलाशने का भी मौका है।
यदि हम एेसा कर सके तो भारत दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक होगा।
इस कार्यशाला में समुद्र विज्ञान के क्षेत्र में होने वाले नये नये शोधों और भारत द्वारा विश्व मंच पर हाल में प्रस्तुत की गयी ‘ब्ल्यू इकॉनोमी’ यानी नीली क्रांति की अवधारणा पर किये जा रहे प्रयासों और संभावनाओं से मीडिया जगत के प्रतिनिधियों को अवगत कराया जाएगा।
पृथ्वी के 70 प्रतिशत भाग पर समुद्री खारे जल खेती एवं पीने योग्य बनाने के उपयोग के साथ साथ समुद्री क्षेत्र में तेल एवं गैस जैसे पेट्रोलियम पदार्थाें के उत्खनन एवं खोज, समुद्र की लहरों से उत्पन्न ऊर्जा से बिजली का निर्माण आदि संभावनाओं पर भारतीय वैज्ञानिक अरसे से काम कर रहे हैं।
सरकार अब इन कामों को अब देश के सामने लाना चाहती है।


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