नई दिल्ली .... आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर आम सहमति बनाने पर जोर दिया है, ताकि समाज में मतभेद न हों। उन्होंने वीर सावरकर को भारत रत्न देने का समर्थन किया और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में देश के हितों की रक्षा की बात भी कही।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को बनाते समय सभी को विश्वास में लिया जाना चाहिए और इससे मतभेद नहीं पैदा होने चाहिए। भागवत ने आरएसएस के शताब्दी समारोह के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में यह बात कही। हाल में हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भागवत ने कहा कि समझौतों में लेन-देन होता है। उन्होंने कहा, ‘‘यह दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होना चाहिए... हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमें नुकसान न हो। हिंदुत्व विचारक वीर सावरकर को भारत रत्न स मान दिए जाने की मांग पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सावरकर को यह पुरस्कार दिए जाने से इसकी प्रतिष्ठा और बढ़ जाएगी। भागवत ने यह भी कहा कि आरएसएस के लिए ‘अच्छे दिन’ स्वयंसेवकों की कड़ी मेहनत और वैचारिक नीतियों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के कारण आये हैं। भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ का सरसंघचालक किसी जाति का नहीं होगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ब्राह्मण, क्षत्रिय या अन्य जाति का होना जरूरी नहीं है, केवल एक शर्त है, जो बने वह हिंदू होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जाति के आधार पर पद का चयन नहीं किया जाता, केवल हिन्दू होने की शर्त जरूरी है। बता दें कि मोहन भागतव ने मुंबई में आयोजित आरएसएस के शताब्दी वर्ष के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान कही। इस दौरान मोहन भागवत ने उनकी उम्र 75 साल हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद संघ ने उनसे काम जारी रखने को कहा है। उन्होंने साफ किया कि संघ में पद छोड़ने का फैसला संगठन करता है, न कि कोई व्यक्ति खुद। उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख का कोई चुनाव नहीं होता। क्षेत्र और प्रांत के प्रमुख मिलकर सरसंघचालक का चयन करते हैं। आम तौर पर कहा जाता है कि 75 साल के बाद बिना पद के काम करना चाहिए। मैंने अपनी उम्र के बारे में संघ को बताया, लेकिन संगठन ने मुझसे काम जारी रखने को कहा है। उन्होंने आगे कहा कि जब भी आरएसएस कहेगा, मैं पद छोड़ दूंगा, लेकिन काम से रिटायर होना कभी नहीं होगा।