नई दिल्ली ..... भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर चर्चाएं तेज हैं। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए इस डील को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब दिया। गोयल ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि भारत ने इस समझौते में अपनी संप्रभुता से समझौता किया है। उन्होंने कहा कि ऐसी बातें करने वाले लोग अज्ञानी हैं। यह ट्रेड डील एक लेबर ऑफ लव है।
पीयूष गोयल ने कहा कि कृषि के मामले में भारत के किसानों और उत्पादकों के हितों का 100 फीसद ध्यान रखा गया है। उन्होंने बताया कि भारत ने मांस, पोल्ट्री, जीएम फूड्स या उनके उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दी है। इसके अलावा सोया मील, मक्का, चावल, गेहूं जैसे अनाज और ज्वार, बाजरा, रागी जैसी फसलों पर भी कोई छूट नहीं दी गई है। उन्होंने आगे कहा कि भारत में पैदा होने वाले फल जैसे केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी, खट्टे फल, हरी मटर, काबुली चना, मूंग जैसी दालें, तिलहन, मूंगफली और शहद जैसे उत्पादों पर भी कोई समझौता नहीं किया गया है। ये सभी उत्पाद भारत के लिए संवेदनशील हैं और इनके मामले में कोई नरमी नहीं बरती गई है। अमेरिका से कच्चा तेल या एलएनजी खरीदने के सवाल पर गोयल ने कहा कि यह भारत के अपने रणनीतिक हितों में है। इससे हमें तेल के स्रोतों में विविधता लाने में मदद मिलती है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कौन कहां से क्या खरीदेगा, यह फैसला कंपनियां खुद लेती हैं। व्यापार समझौते का काम व्यापार के रास्ते को आसान बनाना है।
जल्दबाजी में नहीं हुई कोई बातचीत : पीयूष गोयल ने बताया कि किसी भी देश के साथ व्यापार समझौते की बातचीत बहुत गहन और विस्तृत होती है। इसमें हर एक चीज पर बारीकी से बात की जाती है और भविष्य को ध्यान में रखकर फैसले लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह बहुत धैर्य का काम है और इसे कभी भी जल्दबाजी में नहीं करना चाहिए। इसीलिए मैं हमेशा कहता हूं कि हमें गति रखनी चाहिए, जल्दबाजी नहीं।