नई दिल्ली .... राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि समान नागरिक संहिता को सभी वर्गों को साथ लेकर और आपसी सहमति से बनाया जाना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि यूसीसी के नाम पर समाज में किसी भी तरह का विभाजन नहीं होना चाहिए। आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान भागवत ने कहा कि उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने से पहले करीब तीन लाख सुझाव लिए गए और सभी हितधारकों से चर्चा के बाद ही कानून बनाया गया। यही तरीका पूरे देश में अपनाया जाना चाहिए बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के मुद्दे पर भागवत ने कहा, बांग्लादेश में अभी भी 1.25 करोड़ हिंदू हैं। यदि वे एकजुट हो जाएं, तो वे वहां की राजनीतिक व्यवस्था उपयोग अपने हित और अपनी सुरक्षा के लिए कर सकते हैं। लेकिन उन्हें एकजुट होना होगा। अच्छी बात यह है कि इस बार उन्होंने वहां से भागने का नहीं, बल्कि वहीं रहकर लड़ने का फैसला किया है। अगर अगर उन्हें लड़ना है है, तो एकता जरूरी होगी। जितनी जल्दी वे एकजुट होंगे, उतना ही बेहतर होगा। बांग्लादेश में वर्तमान में हिंदुओं की जितनी संख्या मौजूद है, उससे वे अपनी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार कर सकते हैं। इसके लिए हम यहां अपनी सीमाओं के भीतर और दुनियाभर में अपने-अपने स्थानों पर मौजूद हिंदू, उनके लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। मैं आपको यह आश्वासन दे सकता हूं। उन्होंने कहा कि देश में बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक जैसी कोई चीज नहीं है, हम सभी एक ही समाज का हिस्सा हैं। उन्होंने मुस्लिम और ईसाई समुदायों के साथ विश्वास, मित्रता और संवाद की जरूरत पर जोर दिया। धर्म पर बात करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि जब धर्म में आध्यात्मिकता नहीं रहती, तो वह आक्रामक और हावी होने लगता है। उन्होंने कहा कि आज इस्लाम और ईसाई धर्म में जो कुछ देखने को मिल रहा है, वह पैगंबर मोहम्मद और यीशु मसीह की मूल शिक्षाओं के अनुरूप नहीं है।