नयी दिल्ली... फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रां ने राफाल लड़ाकू विमानों के सौदे को लेकर हो रही आलोचनाओं के बीच गुरुवार को स्पष्ट संकेत दिया कि नये करार के तहत इस विमान के कम से कम 50 प्रतिशत कलपुर्जे भारत में बनाये जा सकते हैं।
भारत यात्रा पर आये श्री मैक्रां ने यहां संवाददाताओं से कहा कि भारत ने कुछ दिन पहले 114 नये राफेल विमानों का ऑर्डर देने और सह-उत्पादन की अपनी इच्छा की पुष्टि की है। राष्ट्रपति ने कहा, "इस नये सौदे में 'मेक इन इंडिया' की केंद्रीय भूमिका होगी।"
उन्होंने इस सौदे की आलोचनाओं के संदर्भ में कहा, "कई लोगों ने सवाल उठाये हैं, लेकिन क्या आपको नहीं लगता कि राफेल विमानों में 50 प्रतिशत स्वदेशी कलपुर्जे होंगे? हम हमेशा स्वदेशी घटकों की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।"
उल्लेखनीय है कि पहले राफाल विमान सौदे की तरह यह सौदा भी दोनों देशों की सरकारों के बीच होने जा रहा है।
इंडिया एआई इम्पैक्ट सम्मेलन से इतर भारतीय और फ्रांसीसी संवाददाताओं के साथ श्री मैक्रां से इस संवाद का वीडियो फ्रांस के राष्ट्रपति भवन ने सोशल मीडिया पर जारी किया है। उन्होंने कहा कि राफाल की विनिर्मात कंपनी दासो भारत सरकार के साथ बातचीत कर रही है और घरेलू उपकरणों के उपयोग के बारे में अंतिम निर्णय इस बातचीत पर निर्भर करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि राफाल जैसे प्लेटफॉर्म के लिए उपकरणों का मानक महत्वपूर्ण है।
फ्रांससी राष्ट्रपति ने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा, "मैं नहीं समझता कि लोग इसकी आलोचना कैसे कर सकते हैं, क्योंकि इससे आपका देश मजबूत होता है।"
उन्होंने कहा कि इस सौदे से दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंध मजबूत होंगे और भारत में रोजगार को बढ़ावा मिलेगा क्योंकि फ्रांस विमान के अधिकाधिक कलपुर्जे और महत्वपूर्ण उपकरणों का निर्माण भारत में सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। यही इस समझौते का उद्देश्य है, जैसा कि टाटा और एयरबस के समझौते में है।
उल्लेखनीय है कि टाटा समूह ने यूरोपीय विमान निर्माता एयरबस के साथ देश में ही एच125 हेलीकॉप्टरों और सी295 सैन्य परिवहन विमानों के निर्माण के लिए समझौता किया है।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते रणनीतिक रिश्तों का उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश भारतीय उपकरणों के इंजन निर्माण में सहयोग जारी रखने और पनडुब्बियों पर अपने संयुक्त कार्य को आगे बढ़ाने पर भी सहमत हुए हैं। फ्रांस पहले से ही छह भारतीय कंपनियों के साथ काम कर रहा है और इन संबंधों के विस्तार पर चर्चा जारी है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ उनके देश के संबंधों में रक्षा सहयोग एक प्रमुख स्तंभ है। दोनों देश तकनीकी और वैज्ञानिक क्षेत्र में भी सहयोग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, "मैं इसे स्पष्ट रूप से लिखकर दे रहा हूं - भारत अपने लड़ाकू विमान स्वयं बनायेगा। इतिहास की दिशा यही है।" उन्होंने दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को इससे बढ़कर एक विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी किये जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भागीदारी अनूठी है। राफेल के संदर्भ में, "हम इस सहयोग का विस्तार करना चाहते हैं"।