नयी दिल्ली... शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को 'डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी' (मानित विश्वविद्यालय) घोषित कर दिया है। इस दर्जे के बाद अब यह संस्था डिग्री भी दे सकेगी।
इस नये दर्जे से एनसीईआरटी का काम सिर्फ स्कूली पाठ्यक्रम बनाने तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अब
यह संस्था डॉक्टरेट और नये तरह के कोर्स समेत कई तरह के अकादमिक कार्यक्रम भी शुरू कर सकेगी। तीस मार्च को शिक्षा मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी की। इसमें एनसीईआरटी और उसकी छह सहयोगी इकाइयों को यूनिवर्सिटी अनुदान आयोग (यूजीसी) अधिनियम, 1956 की धारा 3 के तहत एक 'विशेष श्रेणी' में 'डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी' घोषित किया गया है।
अधिसूचना में कहा गया है, “ शिक्षा मंत्रालय यूजीसी की सलाह पर राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद जिसमें इसकी छह सहयोगी इकाइयां शामिल हैं, को एक विशेष श्रेणी के तहत 'डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी' घोषित करता है। ”
अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर, मैसूर और शिलांग में स्थित क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान और भोपाल में स्थित पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान, वे सहयोगी संस्थान हैं, जो शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किये
गये इन नये नियमों का पालन करेंगे।
इस घोषणा के साथ ही एनसीईआरटी अब यूजीसी के विनियामक दायरे में भी आ गया है। अधिसूचना में कहा गया है, एनसीईआरटी में चलाये जाने वाले सभी अकादेमिक कार्यक्रम यूजीसी द्वारा तय किये गये नियमों और मानकों के अनुरूप होने चाहिए। यह भी कि कोई भी नया पाठ्यक्रम या परिसर के बाहर केंद्र खोलने के लिए यूजीसी के दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा एनसीईआरटी को किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधि करने से भी रोक दिया गया है। अधिसूचना में साफ तौर पर कहा गया है कि यह संस्था “ किसी भी ऐसी गतिविधि में शामिल नहीं होगी या उसे बढ़ावा नहीं देगी, जिसका मकसद व्यावसायिक या मुनाफा कमाना हो। ”
यह बदलाव केंद्र सरकार के उस पिछले प्रस्ताव के लगभग तीन साल बाद हुआ है, जिसमें एनसीईआरटी को ‘राष्ट्रीय महत्व की संस्था’ का दर्जा देने की बात कही गयी थी।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 2023 में उस पिछले प्रस्ताव की घोषणा करते हुए कहा था कि इस कदम से एनसीईआरटी को एक शोध-आधारित संस्था के रूप में विकसित होने और वैश्विक स्तर पर अपनी अकादमिक भागीदारी का विस्तार करने में मदद मिलेगी।