नई दिल्ली .... ईरान में सैन्य प्रदर्शन और कूटनीतिक गतिविधियां एक साथ चलती नजर आ रही हैं। एक ओर राजधानी तेहरान सहित पूरे देश में सरकार समर्थित रैलियों में शक्तिशाली हथियारों का प्रदर्शन किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश भी कर रही है। हम आपको बता दें कि तेहरान की सड़कों पर आयोजित मिसाइल परेड ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। खास बात यह है कि यह परेड संघर्षविराम अवधि समाप्त होने से ठीक पहले आयोजित की गयी थी। यानि ईरान अमेरिका को साफ संदेश दे रहा था कि यदि वह दोबारा युद्ध मैदान में आया तो तेहरान पूरी ताकत के साथ सामना करने के लिए तैयार है। हम आपको बता दें कि परेड के दौरान हजारों सैनिकों के साथ अत्याधुनिक हथियारों, ड्रोन और वायु रक्षा प्रणालियों का प्रदर्शन किया गया। इस परेड में एस-300 मिसाइल रक्षा प्रणाली भी दिखाई गई, जिसे देश की सुरक्षा क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने इस आयोजन को देखा और इसकी सराहना की। यह प्रदर्शन स्पष्ट रूप से शक्ति प्रदर्शन का संदेश देता है, जो अमेरिका के साथ ही खाड़ी देशों को यह बताने के लिए है कि ईरान की सैन्य क्षमता मजबूत और सक्रिय है। हथियारों के प्रदर्शनों के दौरान जिस तरह जनता ने सरकार और सेना की सराहना की उससे ईरानी शासन का जोश हाई नजर आ रहा है। साथ ही सैन्य प्रदर्शन के दौरान इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर द्वारा मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का सार्वजनिक प्रदर्शन भी किया गया। इनमें खोर्रमशहर-4 और घदर जैसी मिसाइलें शामिल हैं, जिन्हें अत्यंत घातक माना जाता है। खोर्रमशहर-4 को एक प्रकार का प्रलयकारी हथियार कहा जाता है, जो तरल ईंधन से संचालित होता है और तेज गति से हमला करने में सक्षम है। वहीं सिज्जिल मिसाइल भी चर्चा में रही, जिसकी मारक क्षमता लगभग दो हजार से ढाई हजार किलोमीटर तक बताई जाती है।