लंदन/मास्को....ब्रिटेन ने ईरान की बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी से खुद को अलग करते हुए इसे "गलत तरीका" बताया है, जबकि रूस ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य की स्थिति को "बेहद चिंताजनक" करार दिया है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि होर्मुज़ की स्थिति तेजी से बदल रही है और यह अलग-अलग दिशाओं में विकसित हो रही है, जिससे अनिश्चितता बनी हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मौजूदा युद्धविराम कायम रहेगा और स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ेगा।
ब्रिटेन की वित्त मंत्री रेचल रीव्स ने कहा कि उनका देश अमेरिकी नाकेबंदी में शामिल नहीं होगा और बिना स्पष्ट रणनीति के संघर्ष शुरू करना "गलती" है।
शिपिंग उद्योग से जुड़े इंटरनेशनल चैंबर ऑफ शिपिंग के अध्यक्ष नामित जॉन डेनहोम ने भी स्थिति को "बेहद गंभीर" बताते हुए अमेरिकी पहल को "पीछे की ओर का कदम" बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य को जल्द खोलना जरूरी है और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर शुल्क लगाने जैसे कदम स्वीकार्य नहीं हैं। वर्तमान में करीब 20,000 नाविक खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं।
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने अनुमान जताया है कि वैश्विक तेल मांग अप्रैल-जून तिमाही में 15 लाख बैरल प्रतिदिन घट सकती है, जो कोविड-19 के बाद सबसे बड़ी गिरावट होगी।
रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में ऊर्जा ढांचे पर हमलों और होर्मुज़ में जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंधों के कारण तेल आपूर्ति में ऐतिहासिक व्यवधान देखा गया है।
यह घटनाक्रम 11 अप्रैल को अमेरिका-ईरान वार्ता के विफल होने के बाद सामने आया है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।