नई दिल्ली ... ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पहले विधायक और अब सांसद भी ममता का साथ छोड़कर जाने को उतारु हैं। लेकिन ये पूरा घटनाक्रम संसद में एनडीए की स्थिति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाने वाला है।
जुलाई के तीसरे हफ्ते में संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है। ऐसे में चर्चा है कि सरकार फिर से परिसीमन बिल को पेश कर सकती है। यह बिल अप्रैल में संसद में गिर गया था, क्योंकि सरकार के पास इसे पार कराने के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत नहीं था। परिसीमन बिल या संविधान (131वां संशोधन) बिल 2026 के साथ महिला आरक्षण संविधान संशोधन बिल भी जोड़ा गया था। दो तिहाई बहुमत नहीं होने के कारण दोनों बिल पास नहीं पाए थे। लेकिन तृणमूल में बगावत के सुर एनडीए के लिए फायदे का सौदा हो सकते हैं। लोकसभा में टीएमसी के 29 सांसद हैं।
दावा है कि काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में इनमें से करीब 20 सांसद एक अलग गुट बनाने और एनडीए को समर्थन देने के लिए तैयार हैं। संख्या के लिहाज से देखें तो 543 सदस्यों वाली लोकसभा में दो तिहाई बहुमत का आकंड़ा 362 होता है। अभी बसीरहाट, शिलांग और नौगोंग सीटें मौजूदा सांसदों के निधन के कारण खाली हैं। ऐसे में प्रभावी आंकड़ा घटकर 360 हो गया है। इसमें से एनडीए के पास 293 सांसदों का समर्थन है। अगर टीएमसी के 20 सांसद साथ आ जाएं, तो आंकड़ा बढ़कर 313 पहुंच जाएगा। उधर तमिलनाडु में विजय की सरकार को कांग्रेस का समर्थन मिलने के बाद डीएमके काफी नाराज है। ऐसे में चर्चा है कि डीएमके कुछ खास मु्द्दों पर एनडीए को समर्थन दे सकती है। 313 में डीएमके के 22 सांसदों को जोड़ लें, तो संख्या 335 पहुंच जाएगी। खबर ये भी है कि भाजपा की नजर उद्धव गुट वाली शिवसेना के 9 सांसदों पर है। इनमें से करीब 6 सांसद एनडीए के साथ आ सकते हैं और आंकड़ा 341 तक पहुंच जाएगा।