वॉशिंगटन,.... अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता को सीमित करने और 'बर्थ टूरिज्म' पर रोक लगाने के लिए दो नये कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किये हैं।
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह कदम उस घटना के कुछ सप्ताह बाद उठाया है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इस लंबे समय से चली आ रही संवैधानिक गारंटी को खत्म करने की उनकी पिछली कोशिश को रोक दिया था।
ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) के अनुसार ओवल के कार्यालय से अपने संबोधन में श्री ट्रंप ने कहा, "यह काम सालों पहले हो जाना चाहिए था लेकिन अब हम इसे कर रहे हैं।" उन्होंने 150 साल पुराने इस नियम को खत्म करने की अपनी पिछली कोशिश को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने की आलोचना की।
पहले कार्यकारी आदेश में कहा गया है, "मेरे प्रशासन ने उन बुरे इरादे वाले विदेशी लोगों से होने वाले खतरों से बचाव किया है जो हमारे देश की उदारता का फायदा उठाकर अमेरिकी नागरिकों को धोखा देने की कोशिश करते हैं।"
पहला कार्यकारी आदेश उन गैर-नागरिक माता-पिता की श्रेणी का दायरा बढ़ाता है जिनके बच्चे जन्म के समय अपने आप अमेरिकी नागरिकता पाने के हकदार नहीं होंगे। इस आदेश के तहत अगर अमेरिका में पैदा हुए बच्चे के माता-पिता दोनों गैर-नागरिक हैं, तो उन्हें अपने आप नागरिकता नहीं मिलेगी, बशर्ते उनमें से कोई एक किसी खास विदेशी आतंकवादी समूह का सदस्य हो, विदेशी सरकार का कर्मचारी हो, धोखाधड़ी से अमेरिकी नागरिकता पाने की कोशिश कर चुका हो या अमेरिका के ऐसे इलाकों में रह रहा हो जहां संघीय कानून के तहत नागरिकता नहीं दी जाती है।
दूसरा कार्यकारी आदेश 'बर्थ टूरिज्म' को निशाना बनाता है। इसमें अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे विदेशी नागरिकों को मुख्य रूप से बच्चों को जन्म देने के लिए अमेरिका में आने से रोकें, ताकि उनके बच्चे अमेरिकी नागरिकता पा सकें। ट्रंप प्रशासन के अधिकारी बार-बार 'बर्थ टूरिज्म' का विरोध करते रहे हैं और उन्होंने खासकर रूस और चीन जैसे विरोधी देशों पर आरोप लगाया है कि वे 'बर्थराइट क्लॉज' (जन्म के अधिकार वाले नियम) का फायदा उठाकर अमेरिका में घुसपैठ करने के लिए 'बर्थराइट सिटिजनशिप' का इस्तेमाल करते हैं।
श्री ट्रंप ने ओवल कार्यालय से गुरुवार को इन कार्यकारी आदेशों की घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिका में 'बर्थ टूरिज्म' के जरिए लाखों बच्चे पैदा हुए हैं।
गैर-पक्षपाती 'प्रवासन नीति संस्थान' के अनुमानों के मुताबिक यह संख्या काफी कम है। उनके अनुसार हर साल 'बर्थ टूरिज्म' से जुड़े लगभग 22,000 से 26,000 जन्म होते हैं। संस्थान के बताए सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2024 में विदेशी पते वाली माताओं से लगभग 9,600 बच्चों के जन्म दर्ज किए गए।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि नये आदेशों को नई संवैधानिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया डेविस में कानून के प्रोफेसर गेब्रियल चिन ने कहा कि राष्ट्रपति के पास शायद उन लोगों के आने पर रोक लगाने का अधिकार है जो खास तौर पर 'बर्थ टूरिज्म' के लिए यात्रा करते हैं। उन्होंने हालांकि सवाल उठाया कि क्या कार्यकारी शाखा किसी ऐसे बच्चे को नागरिकता देने से इनकार कर सकती है जिसका जन्म अमेरिका में हुआ हो।
उन्होंने कहा, "लेकिन एक बार जब ऐसा हो जाता है, एक बार जब बच्चा संयुक्त राज्य अमेरिका में पैदा हो जाता है, तो मुझे नहीं लगता कि राष्ट्रपति के पास यह तय करने का कोई अधिकार है कि वह बच्चा नागरिक नहीं है।" उन्होंने कहा कि यह मुद्दा ट्रंप प्रशासन की सुप्रीम कोर्ट में हालिया हार के साथ सुलझ गया था। उन्होंने अमेरिका में होने वाले लाखों जन्मों की तुलना में 'बर्थ टूरिज्म' को 'ऊंट के मुंह में जीरा' बताया। उन्होंने कहा, "यह एक असामान्य घटना है।"