नई दिल्ली ... सुप्रीम कोर्ट ने बॉलीवुड के मशहूर कलाकार राजपाल यादव के चेक बाउंस मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा है। इसके साथ ही कोर्ट ने निचली अदालत को उनके पासपोर्ट वापस करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने ये सारी रियायत तब दी जब एक्टर ने रजिस्ट्री में दो करोड़ रुपये जमा कराएं हैं। इससे पहले कोर्ट ने उन्हें पैसे जमा नहीं कराने पर फटकार लगाते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
राजपाल यादव अपने काम के सिलसिले में विदेश जा सके इसलिए कोर्ट ने उनके पासपोर्ट को वापस करने की इजाजत दे दी। हालांकि इस दौरान उन पर लगे प्रतिबंध जारी रहेंगे। बेंच ने कहा कि पासपोर्ट जारी करने के बाद राजपाल यादव बाहर तो जा सकते हैं लेकिन वो वापस आने की सूचना ट्रायल कोर्ट को अवश्य देंगे। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायधीश जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि पैसे जमा करने से ऐसा लगता है कि इस मामले को आपसी रजामंदी से सुलझाया जा सकता है। राजपाल यादव और उनकी पत्नी ने रजिस्ट्री में दो करोड़ रुपये जमा कराए हैं। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वे इस विवाद को आपसी समझ और सहमति से सुलझाने के लिए एक मध्यस्थ नियुक्त करेंगे। पीठ ने कहा कि इस मामले में दोनों पक्ष मध्यस्थ के साथ बैठ कर बातचीत करें। मध्यस्थ अगर इजाजत दे तो कोई भी पक्ष चाहे तो वो ऑनलाइन या ऑफलाइन जुड़ कर समस्या का समाधान खोज सकता है। सुनआई की शुरुआत में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कोर्ट इस मामले की सुनवाई करेगा, लेकिन बाद में उन्होंने दोनों पक्षों से कहा कि वे मध्यस्थता के जरिए इस विवाद को खत्म करने पर गंभीरता से विचार करें। एक्टर यादव के वकील ने बताया कि उन्होंने रुपयों का इंतजाम करने के लिए अपनी पैतृक संपत्ति बेच दी। इस विवाद की शुरुआत 2010 में हुई थी जब फिल्म पूरी करने के लिए एक्टर और उनकी पत्नी को पांच करोड़ रुपये मिले थे।