लखनऊ से हिंदी एवं उर्दू में एकसाथ प्रकाशित राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र
ताजा समाचार
सुल्तानपुर में फ्लाईओवर का पिलर टेढा होने पर जांच के आदेश
मोदी की टिप्पणी ‘हताशा का चरम’: तृणमूल
बहराइच में पानी के लिये भटका बारहसिंघा, कुत्तों ने नोचा
मलेशिया में नजीब रजाक के घर के आसपास घेराबंदी
बस खाई में गिरी, आठ की मौत
मोदी ने कर्नाटक के लोगों से किया बड़ी संख्या में मतदान करने का आग्रह
अमेरिका ने ईरान पर लगाए नए प्रतिबंध
कांग्रेस कर्नाटक में वापसी को लेकर आशवस्त
इजरायली सैनिकों की गोलीबारी में 350 फिलीस्तीनी घायल
पृथ्वी शॉ की तकनीक सचिन जैसी: मार्क वॉ
अमेरिका की पूर्व पहली महिला बारबरा बुश का निधन
वंशवाद और जातिवाद ने किया यूपी का बंटाढार
मुठभेड़ में लश्कर का शीर्ष कमांडर वसीम शाह ढेर
बलात्कार के मामले में तरुण तेजपाल के खिलाफ आरोप तय
शकुंतला विवि में दिव्यांग छात्रों के लिए बढ़ाई गईं सुविधाएं

राज्य

डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट

मीडिया हाउस, 16/3 'घ',
सरोजिनी नायडू मार्ग, लखनऊ - 226001
फ़ोन : 91-522-2239969 / 2238436 / 40, फैक्स : 91-522-2239967/2239968
ईमेल : dailynewsactivist@yahoo.co.in, dailynewslko@gmail.com
वेबसाइट : http://www.dnahindi.com
ई-पेपर : http://www.dailynewsactivist.com

बैंकों के अति उत्साह की वजह से बढ़ा डूबा कर्ज

बैंकों के अति उत्साह की वजह से बढ़ा डूबा कर्ज

नई दिल्ली (एजेंसियां)।   12 Sep 2018      Email  

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का मानना है कि बैंक अधिकारियों के अति उत्साह, सरकार की निर्णय लेने की प्रक्रिया में सुस्ती तथा आर्थिक वृद्धि दर में नरमी डूबे कर्ज के बढ़ने की प्रमुख वजह है। राजन ने एक संसदीय समिति को दिए नोट में यह राय व्यक्त की है। 
आकलन समिति के चेयरमैन मुरली मनोहर जोशी को दिए नोट में उन्होंने कहा, कोयला खदानों का संदिग्ध आवंटन के साथ जांच की आशंका जैसे राजकाज से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के कारण संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) और उसके बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार में निर्णय लेने की प्रक्रिया में देरी हुई। उन्होंने कहा कि इससे रुकी परियोजनाओं की लागत बढ़ गई। इससे कर्ज की अदायगी में समस्या पैदा हुई। पूर्व गवर्नर ने कहा कि जिस तरह से बिजली परियोजनाएं अटकी हैं जबकि भारत में बिजली की कमी है, उससे पता चलता है कि सरकार की निर्णय प्रक्रिया आज तक तेज नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में बैंकों का डूबा कर्ज या एनपीए 2006 से 2008 के दौरान बढ़ा जबकि आर्थिक वृद्धि दर काफी तेज थी। पुरानी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं मसलन बिजली परियोजनाएं समय पर तय बजट में पूरी हुईं। राजन ने कहा कि यही वह समय था जबकि बैंकों ने गलतियां कीं। उन्होंने पीछे की वृद्धि और प्रदर्शन के आधार पर भविष्य का अनुमान लगाया। ऐसे में उन्होंने परियोजनाओं के लिए बड़ा कर्ज दिया, जबकि उनमें प्रवर्तकों की इम्टिी कम थी। राजन ने कहा कि कई बार बैंकों ने कर्ज देने के लिए प्रवर्तक के निवेशक बैंक की रिपोर्ट के आधार पर करार किया और अपनी ओर से पूरी जांच पड़ताल नहीं की।


Comments

' data-width="100%">

अन्य खबरें