जाने किन मायनों में गोरक्षपीठ की तीन पीढियां खुद में हैं बेमिसाल ? एक दूसरे का गुरुत्व बढ़ाना गुरु-शिष्य की श्रेष्ठतम परंपरा है। गुरु का गुरुत्व, शिष्य की श्रद्धा में होता है। यह श्रद्धा गुरु