नई दिल्ली ..... पीएम मोदी ने कहा, साथियों, पिछले महीने मुझे एक बहुत अच्छा अनुभव हुआ। इसका संबंध ‘मन की बात’ से भी जुड़ा है। इसलिए आज मैं इसकी चर्चा आपसे करना चाहता हूं। तमिलनाडु के नागरकोइल में मेरी मुलाकात एक टीचर से हुई। करीब तीन दशक पहले भी मैं उनसे मिला था। मैं बात कर रहा हूं, गिरिजा अम्मा जी की। इस मुलाकात के दौरान कुछ युवा छात्र भी उनके साथ थे। गिरिजा अम्मा जी करीब 15 स्कूल चलाती हैं। इनमें चेन्नई का जयगोपाल गरोडिया हिन्दू विद्यालय बहुत प्रमुख है। उनकी देशभक्ति की भावना हर भारतवासी को प्रेरित करने वाली है। उन्होंने ‘मन की बात’ से प्रेरणा लेकर देश के अनेक सैनिकों के लिए योगदान का संकल्प लिया। इसके लिए उन्होंने अपने सभी स्कूलों के छात्रों को प्रेरित किया। उन्होंने बच्चों से कहा कि वे वीर जवानों के लिए हर दिन एक रुपया योगदान दें। यानी एक साल में हर छात्र की ओर से 365 रुपये जमा हुए। इस छोटे-छोटे योगदान से करीब 40 लाख रुपये इकट्ठा हुए। गिरिजा अम्मा जी ने इस पूरी राशि का चेक मुझे सौंपा। उनसे बातचीत के दौरान मैंने महसूस किया कि मां भारती के प्रति उनका समर्पण कितना गहरा है।
पिछले वर्ष ही चेन्नई के पहले हिन्दू विद्यालय ने अपने 50 वर्ष पूरे किए हैं। देश की शिक्षा और सांस्कृतिक गौरव को आगे बढ़ाने में इस स्कूल नेटनर्क की भूमिका बहुत प्रशंसनीय है। मैं इससे जुड़े सभी लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं और उन छात्रों की भी विशेष सराहना करता हूं, जिन्होंने अपने वीर सैनिकों के लिए योगदान दिया।
मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा, साथियों, ऐसी ही यादों को बचाने की एक प्रेरक गाथा उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से सामने आई है। बस्ती के आकाश गुप्ता अपने गांव की मनोरमा नदी को देखकर बहुत दुखी होते थे, क्योंकि जिस नदी को उन्होंने बचपन में साफ और जीवंत देखा था। समय के साथ उस नदी में प्लास्टिक जमा होने लगा था। गंदगी बढ़ती चली जा रही थी। आकाश ने तय किया कि शिकायत नहीं करेंगे, एक नई शुरुआत करेंगे। शिकायत नहीं, शुरुआत मंत्र बन गया। उन्होंने अपने दोस्तों को साथ लिया। सिर्फ जाल था, फावड़ा था, टोकरी थी और सबसे बड़ी ताकत थी, कुछ बदलने का संकल्प। ये युवा नदी में उतरते थे, जलकुंभी निकालते थे। प्लास्टिक और कचरा बाहर लाते थे। कई बार एक दिन में 50-60 किलो तक कचरा नदी से निकाला गया। धीरे-धीरे मनोरमा नदी का वह हिस्सा फिर से साफ दिखने लगा। आसपास के लोगों का ध्यान भी इस काम की तरफ गया। लोगों में स्वच्छता को लेकर जागरुकता बढ़ी।
पीएम मोदी ने कहा, साथियों, ‘मन की बात’ कार्यक्रम को जो लोग टीवी पर देख रहे हैं, मैं उनसे कहूंगा-एक वीडियो जरूर देखिएगा। ये वीडियो पिछले दिनों बहुत चर्चा में रहा। इसमें कुछ लोग बहुत धैर्य से, बहुत सावधानी से एक गंगा डॉल्फिन को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। आपको ये जानकर आश्चर्य होगा, इस पूरे प्रयास में करीब 13 घंटे लगे और आखिरकार वो डॉल्फिन बच गई। उन्होंने कहा, साथियों, इसमें बहुत बड़ी भूमिका रही- भारत की पहली गंगा डॉल्फिन रेस्क्यू एंबुलेंस की। ये घटना उत्तर प्रदेश की है। वहां एक गंगा डॉल्फिन नहर में फंस गई थी 7 ऐसे समय में ‘नमामि गंगे अभियान’ के तहत बनी ये एंबुलेंस उसके लिए उम्मीद बनकर पहुंची। फिर बहुत सावधानी से उसे बाहर निकाला गया 7 उसकी जांच की गई, उसका इलाज किया गया और उसके बाद उसे सुरक्षित राप्ती नदी में छोड़ दिया गया। एक तरह से कहें, तो एक जीवन, फिर अपने घर लौट गया।
पीएम मोदी ने कहा, साथियों, हम भारतीयों में खगोल विज्ञान यानी एस्ट्रोनॉमी को लेकर हमेशा विशेष आकर्षण रहा है। हमारे देश में आज भी सदियों पुरानी वेधशालाएं मौजूद हैं। यहां अद्भुत गणितीय खोज हुई हैं 7 नेविगेशन हो, पंचांग हो, या हमारे पर्व-त्योहार, इन सबका संबंध आकाश और तारों से रहा है। हमारे यहां एस्ट्रोनॉमी ने हर पीढ़ी में कौतूहल जगाया है। उसे अन्वेषण के लिए प्रेरित किया है और आज के युवाओं में भी इसे लेकर काफी उत्साह दिखाई देता है। पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में कहा, मेरे प्यारे देशवासियों, बीते दिनों मुझे यूरोप के नीदरलैंड्स जाने का अवसर मिला। वहां मैं कई बैठक में शामिल हुआ। इसी दौरान एक ऐसा क्षण आया जिसने हर भारतीय को गर्व से भर दिया। नीदरलैंड्स में आयोजित एक विशेष समारोह में चोला काल की प्राचीन ताम्र पट्टिकाएं भारत को वापस सौंपी गईं।
पीएम मोदी ने कार्यक्रम में कहा, साथियों, एक इवेंट जिसकी देशभर में बहुत चर्चा हो रही है, वह है - 100 मीटर रेस, सौ मीटर की दौड़। महज दो दिनों के भीतर 100 मीटर रेस के पुरुष वर्ग में नेशनल रिकॉर्ड तीन बार टूटा 7 जिन दो एशलीट्स ने ये कमाल दिखाया है वे हैं - गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर।