लखनऊ ..... राज्य में कैदियों की समयपूर्व रिहाई को लेकर नए नियम बनाए जाएंगे। वर्तमान में कैदियों की समयपूर्व रिहाई गंभीर बीमारी, दिव्यांगता व उनकी आयु के आधार पर की जाती है। साथ ही महिला कैदियों को रिहाई में प्राथमिकता दी जाती है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के सुझाव और उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद अब कारागार प्रशासन बंदियों की समयपूर्व स्थायी रिहाई को लेकर नए नियम बना रहा है।
शनिवार को राजभवन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं विभाग की बैठक में कैदियों की रिहाई से संबंधित विभिन्न प्रविधानों, उद्देश्यों एवं प्रक्रिया पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने इस संदर्भ में समयपूर्व रिहाई से संबंधित नीति, पात्रता मानदंड, प्रक्रिया तथा अपेक्षित सुधारात्मक पहलुओं को लेकर राज्यपाल को प्रस्तुतिकरण भी दिया। राज्यपाल ने कहा कि समयपूर्व रिहाई की प्रक्रिया पारदर्शी, न्यायसंगत एवं सुधारात्मक उद्देश्य को लेकर होनी चाहिए। कैदियों को कारागारों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कैदियों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और उनकी आय व कौशल विकास पर और ध्यान देने की जरूरत पर बल दिया। राज्यपाल ने गुजरात स्थित राष्ट्रीय फारेंसिक साइंस विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय रक्षा शक्ति महाविद्यालय तथा इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के अपने दौरे के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि इन संस्थानों में अपराध की जांच, दोषियों की पहचान एवं गिरफ्तारी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), फारेंसिक विज्ञान एवं अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। राज्यपाल ने कहा कि जेल परिसरों में कैदियों द्वारा उपजाई जा रही शाक-सब्जियों के उपयोग की संभावनाओं का अध्ययन किया जाए।