सिंचाई विभाग में खेल: बड़े-बड़े गोलमाल कर विभाग का मेठ बन गया सेठ
- सेटलमेंट बाबू के शार्प माइंड से हुआ खेल, अफसरों की मनीटरिंग हुई फेल
- जब नहीं हैं दैनिक वेतनभोगी तो कैसे गोल हो गया 90 लाख का बजट
गाजीपुर (डीएनएन)। सिंचाई विभाग से जुड़े नलकूप खंड प्रथम व द्वितीय में गड़बड़झाले का मकड़जाल फैल गया है। विभाग से जुड़ा एक ‘सेटलमेंट बाबू’ यानि लिपिक और ‘गुप्ता जी’ यानि मेठ मिलकर खुलेआम सरकारी धन का बंदरबांट कर रहे है और इन्हें प्रश्रय देने वाला कोई और नहीं बल्कि विभाग के एक जिम्मेदार ‘बड़े साहब’ है। विभाग में चल रहे लाखों करोड़ों के गोलमाल के पीछे ‘गुप्ता जी’ का बहुत बड़ा योगदान है। सूत्रों के मुताबिक मेठ के पद पर रहते हुए गुप्ता जी की विभाग में ऊपर से लेकर नीचे तक इतनी धाक बनी है कि वह डायरेक्ट ‘लखनऊ’ जाते है और तथाकथित फर्जी मदों का गोलमोल आंकड़ा दिखाकर लाखों का बजट लेकर चले आते है। सूत्र बताते है कि बजट लाने के लिए ‘गुप्ता जी’ विभाग में बीस से तीस प्रतिशत धन भी खर्च करते है। अब आप ही सोच लिजिए की इस विभाग में एक ‘मेठ’ पद पर कार्यरत कर्मचारी की धाक कितनी मजबूत है। रहा सवाल ‘सेटलमेंट बाबू’ का तो एक समय ऐसा भी था जब वह एक ऐसी कुर्सी पर विराजमान थे जहां सिर्फ ‘मक्खियां’ भिनभिनाया करती थी, लेकिन समय बदला और सेटलमेंट बाबू को बड़े साहब का आर्शिवाद प्राप्त हो गया और अब स्थिति यह हो गई है कि बड़े साहब की हामी हो या न हो, लेकिन सेटलमेंट बाबू के एक इशारे पर लाखों रुपयों का व्यारा-न्यारा जरुर हो जाता है। विभागीय पोर्टल पर जारी हुए विभिन्न मदों के बजट के आधार पर आंकलन किया जाये तो यहा करोड़ों रुपयों का गोलमाल हो चुका है। यह दिगर है कि इस विभाग में ‘चोर-चोर मौसेरे भाई’ वाली कहावत सटीक बैठती हैं, इसलिए गोलमाल को ओपेन करने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है।
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दैनिक वेतन भोगियों के नाम पर आये 90 लाख रुपये कहा हो गये गोल
विभागीय पोर्टल पर आये विभिन्न मदों पर नजर धुमाये तो पता चल जायेगा कि यहां होने वाला ‘गोलमाल’ किस स्तर का है। सूत्रों के मुताबिक विभाग में दैनिक वेतनभोगी कर्मियों के नाम पर सात-आठ माह के भीतर करीब 90 लाख रुपये आये, लेकिन इतनी लम्बी बजट में काफी रुपये कहा गोल हो गये इसकी जानकारी देने से विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कतरा रहे है। जहां एक तरफ अधीक्षण अभियंता कह रहे है कि उनके विभाग में कोई दैनिक वेतन भोगी नहीं हैं वहीं दूसरी ओर अधिशासी अभियंता भी यहीं बात कह रहे है। फिर इस मद में 90 लाख रुपये ‘एलाटमेंट’ कैसे हुआ। यह सवाल किसी के जेहन में उतर नहीं रहा है। विभागीय पोर्टल से प्राप्त हुए रिकार्ड की माने तो इस मद में 90 लाख रुपये एलाट हुआ, लेकिन बिना दैनिक वेतन भोगियों के रहते यह धन कहा खपा दिया गया। बताते चले कि वर्ष 2023 में करंडा क्षेत्र के परमेठ गांव निवासी अम्बिका दूबे ने जनसूचना अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत धारा 6(1) के उपबंधों के आधीन विहित शुल्क के साथ तत्कालीन अधिशासी अभियंता नलकूप खंड प्रथम से सूचना मांगी थी कि अपने अधिनस्थ स्टोर व कार्यशाला में कुल कितने श्रमिक कार्यरत है और उनके दैनिक उपस्थिति पंजिका वेतन बीजक की छह माह की प्रमाणित छायाप्रति उपलब्ध कराई जाये। उस वक्त भी विभाग ने यह सूचना अम्बिका दूबे को उपलब्ध नहीं कराई थी।
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मेरे विभाग में दैनिक वेतन भोगी हैं इसकी जानकारी मुझे नहीं है। जहां तक मैं जानता हूं कि हमारे यहा दैनिक वेतन भोगी कर्मी नहीं है। रहा सवाल बजट का तो इस सम्बंध में कोई बजट मेरे स्तर से पास नहीं होती है। मैंने इस सम्बंध में किसी बजट को भी अप्रूव भी नहीं किया है। विभाग में क्या कार्य करना है उसका पूरा खाका तैयार करने के बाद बजट से जुड़े अधिकांश कार्य ‘आर्हरण वितरण अधिकारी’ करते है। फिलहाल यदि ऐसा हुआ है तो इसकी जांच अवश्य कराई जायेगी।
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मेरे विभाग में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी नहीं है। यदि होंगे भी तो इसकी जानकारी मुझे नहीं है। राहुल अग्रहरि-अधिशासी अभियंता, नलकूल खंड