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हैदराबाद कांड के चारों आरोपी मुठभेड़ में ढेर

हैदराबाद कांड के चारों आरोपी मुठभेड़ में ढेर

हैदराबाद/नई दिल्ली (भाषा)।   07 Dec 2019      Email  

घटनास्थल पर सीन रिक्रिएशन के दौरान आरोपियों ने पुलिसकर्मियों के हथियार छीनकर की गोलीबारी, जवाबी कार्रवाई में गई सभी की जान, दो पुलिसकर्मी घायल
हैदराबाद में पशु चिकित्सक से बलात्कार और हत्या मामले के सभी चार आरोपी शुक्रवार अल सुबह पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे गए। एक ओर इस घटना की जहां जमकर प्रशंसा हुई, वहीं न्यायेतर कार्रवाई को लेकर तमाम लोगों ने चिंता भी जताई है। पुलिस ने कहा कि ये मुठभेड़ सुबह पौने छह बजे से सवा छह बजे के बीच हुई। घटना उस समय हुई जब जांच को दौरान पुलिस की 10 सदस्यीय टीम आरोपियों को घटनाक्रम के रिक्रिएशन के लिए किसी अज्ञात जगह से हैदराबाद से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित घटनास्थल ले गई थी। 20 से 24 वर्ष की आयु वाले चारों आरोपियों को हथकड़ी नहीं लगाई गई थी। पुलिस के अनुसार इनमें मुख्य आरोपी मोहम्मद आरिफ (26), चेन्नाकेशवुलू, जोलू शिवा और जोलू नवीन (सभी की आयु 20 वर्ष) शामिल थे। आरोपी पुलिस हिरासत में थे। 25 वर्षीय युवती से कथित तौर पर बलात्कार करने, उसकी हत्या करने और उसके बाद उसका शव जलाने के लिए 29 नवंबर को चार व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया था। इस घटना को लेकर बड़े पैमाने पर आक्रोश उत्पन्न हो गया था और इस घटना से दिल्ली में 16 दिसम्बर 2012 को हुई घटना की यादें ताजा हो गई थीं जब एक फिजियोथेरेपी इंटर्न के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था और जिसकी बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। साइबराबाद पुलिस आयुक्त वीसी सज्जनर ने संवाददाताओं को बताया कि उनके कर्मियों ने तब जवाबी गोलीबारी की जब दो आरोपियों ने पुलिसकर्मियों से हथियार छीनकर पुलिस पर गोलियां चलाईं। उन्होंने कहा कि आरोपियों में शामिल आरिफ ने सबसे पहले गोली चलाई और उसके बाद चेन्नाकेशवुलू ने गोली चलाई। वहीं पुलिस टीम पर पत्थर एवं अन्य चीजों से भी हमला किया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने शुरूआत में संयम बरता और आरोपियों से आत्मसमर्पण करने के लिए कहने के बाद गोली चलाई। उन्होंने कहा कि छीने गए हथियार अनलॉक (गोलीबारी की स्थिति में) थे। उन्होंने कहा कि गोलीबारी की जब घटना हुई उस समय आरोपियों को हथकड़ी नहीं लगाई गई थी और यह घटना आज सुबह पौने छह बजे से सवा छह बजे के बीच हुई। सज्जनर ने कहा कि पुलिस के एक उप निरीक्षक और एक कान्स्टेबल को सिर में चोटें आई हैं और उनका इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें कोई गोली नहीं लगी है। पुलिस आयुक्त ने कहा कि यद्यपि हमारे अधिकारियों ने संयम बरता और उन्हें आत्मसमर्पण करने के लिए कहा, आरोपियों ने बात सुनने के बजाय गोलीबारी जारी रखी और हमला किया, हमारे कर्मियों ने जवाबी कार्रवाई की। उस जवाबी कार्रवाई में चार आरोपी मारे गए। उन्होंने कहा कि देखने पर चारों के शवों पर गोलियों के घाव दिखे। उन्होंने पुलिस द्वारा स्थिति संभालने को लेकर की जा रही आलोचना पर जवाब में कहा, कानून ने अपना दायित्व निभाया है और मैं यही कह सकता हूं। यह पूछे जाने पर कि पुलिसकर्मी आरोपियों को सुबह के समय क्यों ले गए, आयुक्त ने कहा कि आरोपियों को नाराज जनता से काफी खतरा था और इसलिए उन्हें उस समय ले जाया गया। आरोपियों के शव अपराध स्थल से कुछ सौ मीटर की दूरी पर पड़े दिखे। उनमें से एक के हाथ में पिस्तौल थी। चारों के शव नहीं जोते गए खेत के एक टुकड़े में विधिक प्रक्रिया के लिए पड़े हुए थे। इस खेत के एक ओर धान और टमाटर के खेत जबकि दूसरी ओर हैदराबाद-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग था। एक मेडिकल टीम मौके पर पहुंची और एक चिकित्सक ने संवाददाताओं से कहा कि पोस्टमार्टम पास के महबूबनगर जिले में कराया जाएगा। चारों आरोपियों के परिवार अपने परिजनों की मौत की खबर सुनकर हैरान थे। एक के पिता ने सवाल किया कि क्या उसके पुत्र के साथ ऐसा व्यवहार होना चाहिए था। आरोपियों के मुठभेड़ में मारे जाने की खबर पर कुछ लोगों ने खुशी जताई जबकि कुछ लोगों ने इस पर चिंता व्यक्त की। पशु चिकित्सक के पिता और बहन ने कहा कि वे खुश हैं और उन्होंने इसके लिए पुलिस तथा तेलंगाना सरकार को धन्यवाद दिया। पशु चिकित्सक के पिता ने कहा कि हमने टीवी पर देखा कि वे मुठभेड़ में मारे गए हैं। हम बहुत खुश हैं। लोग भी खुश हैं। मैं मुठभेड़ के लिए तेलंगाना सरकार और पुलिस का शुक्रिया अदा करता हूं। मैं हमारे साथ खड़े रहे सभी लोगों का शुक्रिया करता हूं। पशु चिकित्सक की बहन ने कहा कि इस घटना से (महिलाओं के खिलाफ) ऐसे अपराध करने वाले लोगों में भय उत्पन्न होगा। हैदराबाद बलात्कार एवं हत्याकांड की शिकार महिला को दिशा नाम दिया गया है जबकि दिल्ली में बलात्कार पीड़ित युवती को निर्भया नाम दिया गया था। लोगों ने पशु चिकित्सक को श्रद्धांजलि अर्पित की और नारे लगाए कि न्याय हो गया है। कुछ ने तेलंगाना पुलिस जिंदाबाद के नारे भी लगाए। लोगों ने पुलिसकर्मियों को मिठाइयां बांटी और कुछ ने मुठभेड़ स्थल और हैदराबाद के अन्य हिस्सों में पटाखे छोड़कर जश्न मनाया और पुलिस को बधाई दी। वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस घटना पर संज्ञान लिया और जांच का आदेश दिया। आयोग ने एक बयान में कहा कि मुठभेड़ चिंता का विषय है और इसकी सावधानीपूर्वक जांच किए जाने की जरूरत है। कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने अपना आक्रोश जताया और कहा कि पुलिस किसी भी परिस्थिति में पीट-पीटकर मार डालने वाली भीड़ की तरह काम नहीं कर सकती। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कहा कि मुठभेड़ प्राधिकारियों का कदम लोगों का ध्यान महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने में सरकार की विफलता से बंटाने का एक प्रयास है। कार्यकर्ताओं ने एक संपूर्ण जांच की मांग की। आल इंडिया प्रोग्रेसिव वीमेंस एसोसिएशन की सचिव कविता कृष्णन के अनुसार चार व्यक्तियों का मारा जाना न्याय नहीं बल्कि पुलिस, न्यायपालिका, सरकारों की जवाबदेही और महिलाओं के लिए न्याय एवं गरिमा की मांगों को दबाने का एक षड्यंत्र है। सज्जनर ने पुलिस द्वारा की गई गोलीबारी की घटनाक्रम के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि पुलिस टीम आरोपियों को उनके बयान के आधार पर सेलफोन और अन्य चीजें बरामद करने के लिए उस स्थान पर लेकर गई थी। उन्होंने कहा कि सभी चार आरोपी एकजुट हो गए और पुलिस दल पर पत्थर एवं अन्य चीजों से हमला करने लगे। उनमें से दो ने हमारे दो अधिकारियों से हथियार भी छीन लिए और गोलीबारी करने लगे। इस बीच, कई नेताओं ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। संसद भवन परिसर में संवाददाताओं द्वारा इस मुठभेड़ के बारे में पूछे जाने पर सपा की राज्यसभा सदस्य जया बच्चन ने अपनी संक्षिप्त प्रतिक्रिया में इतना ही कहा देर आए दुरुस्त आए। बसपा अध्यक्ष मायावती ने भी पुलिस की उसके द्वारा आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्वाई की प्रशंसा की। वहीं कांग्रेस नेता एवं लोकसभा सांसद शशि थरूर ने कहा कि न्यायेत्तर हत्या स्वीकार्य नहीं है। दूसरी ओर तेलंगाना उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को महिला पशु चिकित्सक से बलात्कार और उसकी हत्या के आरोपियों के कथित मुठभेड़ में मारे जाने के बाद उनके शवों को नौ दिसंबर रात आठ बजे तक सुरक्षित रखने के निर्देश शुक्रवार को दिए। उच्च न्यायालय ने यह आदेश मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय को मिले एक प्रतिवेदन पर दिया, जिसमें घटना पर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया है कि यह न्यायेतर हत्या है। उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि सभी आरोपियों के शवों का पोस्टमॉर्टम होने के बाद उसका वीडियो सीडी में अथवा पेन ड्राइव में महबूबनगर के प्रधान जिला न्यायाधीश को सौंपा जाए। अदालत ने महबूबनगर के प्रधान जिला न्यायाधीश के सीडी अथवा पेन ड्राइव लेने और उसे रविवार शाम तक उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को सौंपने के निर्देश दिए।


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