डीएनएन : अटवा,जिला-उन्नाव, के गांव मेथीटीकुर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवे दिन आचार्य हर्षित तिवारी ने भगवान कृष्ण के जन्म और लीलाओं की कथा सुनाई। कथा सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए।
कथावाचक आचार्य हर्षित तिवारी ने कहा कि परमात्मा ही परम सत्य है। उन्होंने समझाया कि जब हमारी वृत्ति परमात्मा में लगती है, तो संसार का मोह समाप्त हो जाता है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि यदि परमात्मा संसार में घुले-मिले हैं, तो संसार के नाश होने पर परमात्मा का नाश क्यों नहीं होता?
इसका उत्तर देते हुए उन्होंने बताया कि भगवान संसार से जुड़े भी हैं और उससे अलग भी। जैसे आकाश में बादल रहता है और बादल के अंदर भी आकाश तत्व होता है। बादल के गायब होने पर भी आकाश गायब नहीं होता, उसी तरह संसार के समाप्त होने पर भी परमात्मा का अस्तित्व बना रहता है। संसार की कोई भी वस्तु भगवान से अलग नहीं है।
आचार्य ने आगे बताया कि श्रीकृष्ण केवल ग्वाल-बालों के सखा ही नहीं थे, बल्कि उन्हें दीक्षित करने वाले जगद्गुरु भी थे। श्रीकृष्ण ने उनकी आत्मा का जागरण किया और उन्हें आत्मिक स्तर पर स्थित रहकर सुंदर जीवन जीने का अनूठा पाठ पढ़ाया।
इस अवसर पर सूर्योदय शुक्ला ,रमाकांत बाजपेई ,सत्यप्रकाश तिवारी ,गौरव तिवारी ,विकाश तिवारी ,आशू तिवारी ,पंकज तिवारी ,गौरव शुक्ला ,राहुल तिवारी ,आशीष गुप्ता ,रामसरोहन तिवारी ,पुत्तन तिवारी ,सूरज सिंह ,विनय सिंह ,अमन गुप्ता एवं समस्त कमेटीसहित कई भक्तगण उपस्थित थे।