नयी दिल्ली .... विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत में अशांति फैलाने के लिए ड्रोन ट्रेनिंग नेटवर्क चलाने के आरोप में गिरफ्तार किये गये यूक्रेन के छह नागरिकों को वाणिज्य दूतावास से संपर्क की सुविधा के लिए यूक्रेन से अनुरोध मिला है और इस पर कोई भी निर्णय कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखकर लिया जायेगा। एनआईए ने इस मामले में बुधवार को छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया था।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को यहां साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में यूक्रेन के उसके गिरफ्तार नागरिकों को वाणिज्य दूतावास से संपर्क की सुविधा से संबंधित सवाल पर कहा," हां, हमें वाणिज्य दूतावासीय संपर्क का अनुरोध प्राप्त हुआ है और इसका इस विशेष मामले में लागू कानूनी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए संबोधित किया जाएगा।" उन्होंने कहा ," यह एक कानूनी मामला है। यह वर्तमान में जांच के अधीन है और हम देखेंगे कि इसे आगे कैसे बढ़ाया जाए। वाणिज्य दूतावासीय पहुंच का अनुरोध किया गया है और हम इसे मामले की कानूनी आवश्यकताओं के अनुसार इसे देखेंगे।"
यह पूछे जाने पर कि क्या आरोपियों के पास मेघालय के संरक्षित क्षेत्र में जाने का परमिट था प्रवक्ता ने कहा ," देखिए, भारत में कुछ क्षेत्र प्रतिबंधित होते हैं और कुछ संरक्षित क्षेत्र होते हैं। उन क्षेत्रों में यात्रा करने के लिए अनुमति की आवश्यकता होती है। उनके पास यह विशेष अनुमति थी या नहीं, यह अब न्यायालय के समक्ष है। इसे प्रस्तुत किया जाएगा और उसके बाद हमें जानकारी होगी। इस संबंध में मैं आपको राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा दी गई जानकारी देखने की सलाह दूँगा।"
इस बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए उन्होंने कहा ," मैं इसके तकनीकी विवरणों में नहीं गया हूँ, लेकिन मेरी समझ है कि भारत के उस हिस्से में यात्रा करने के लिए उनके पास कुछ आवश्यक दस्तावेजों की कमी हो सकती है।"
यूक्रेन के यहां स्थित दूतावास ने उसके छह नागरिकों की हिरासत पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इस मामले में "राजनीतिक रूप से प्रेरित" पहलू हो सकता है।
एक प्रेस विज्ञप्ति में दूतावास ने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि यह मामला संभवतः रूस द्वारा प्रदान की गई सूचनाओं के आधार पर शुरू किया गया हो सकता है, जिससे इसकी विश्वसनीयता पर प्रश्न उठते हैं।