नयी दिल्ली... पश्चिम एशिया संकट के बादलों के बीच अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने मंगलवार को चालू वित्त वर्ष के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया है।
आईएमएफ की आज जारी विश्व आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 और अगले साल 2027-28 में भारतीय अर्थव्यवस्था 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनी रहेगी।
पिछले वित्त वर्ष (2025-26) में भारत की वृद्धि दर 7.6 फीसदी रही थी।
दोनों साल के वृद्धि अनुमान में इस साल जनवरी में जारी रिपोर्ट की तुलना में 0.1 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है। उस समय ऊंचे अमेरिकी आयात शुल्क का कारण आईएमएफ ने वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत होने का अनुमान व्यक्त किया था।
चालू वित्त वर्ष का आईएमएफ का यह अनुमान विश्व बैंक के 6.6 प्रतिशत और रिजर्व बैंक के 7.1 प्रतिशत के अनुमान से कम है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में कहा गया है कि अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किये जाने का सकारात्मक प्रभाव पश्चिम एशिया संघर्ष के दुष्प्रभावों पर भारी पड़ा है जिस वजह से वृद्धि दर बढ़ायी गयी है।
आईएमएफ ने मौजूदा वित्त वर्ष में भारत में महंगाई दर 4.7 प्रतिशत और अगले वित्त वर्ष में चार प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है। उसने चालू खाते का घाटा पिछले वित्त वर्ष के जीडीपी के 0.9 प्रतिशत से बढ़कर दो प्रतिशत पर पहुंचने की आशंका जाहिर की है। वहीं, बेरोजगारी दर के 4.9 प्रतिशत पर स्थिर रहने की बात कही गयी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से देश का आर्थिक परिदृश्य अंधकारमय हो गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से और ईंधनों की आपूर्ति में आयी बाधा के कारण "अभूतपूर्व ऊर्जा संकट" पैदा हो गया है।
इसमें कहा गया है कि युद्ध ने स्थिर विकास गति पर ब्रेक लगा दिया है। युद्ध शुरू होने से पहले आईएमएफ वैश्विक विकास अनुमान बढ़ाने वाला था, लेकिन अब इसे घटाना पड़ा है।
आईएमएफ ने साल 2026 के लिए वैश्विक विकास का अनुमान घटाकर 3.1 प्रतिशत कर दिया है। यह जनवरी की रिपोर्ट के मुकाबले 0.2 प्रतिशत कम है।