नई दिल्ली ... भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एआई को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि एआई अब केवल एक कल्पनात्मक तकनीक नहीं, बल्कि एक वास्तविकता बन चुकी है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस दशक में लिए जाने वाले निर्णय तकनीक, शक्ति, स्वतंत्रता और न्याय के बीच भविष्य के संबंधों को निर्धारित करेंगे। ब्रिटेन के बर्कबेक, लंदन विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड इंटरनेशनल लॉ’ विषय पर आयोजित सार्वजनिक व्याख्यान में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि तकनीक न तो स्वभाव से अच्छी होती है और न ही बुरी। कानून की जिम्मेदारी तकनीकी प्रगति का विरोध करना या उसके सामने बिना सवाल झुक जाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी शक्ति संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक वैधता और मानवीय गरिमा के प्रति जवाबदेह बनी रहे। उन्होंने कहा कि एआई शासन, व्यापार, युद्ध, संचार, सार्वजनिक प्रशासन और यहां तक कि न्यायिक एवं संप्रभु शक्तियों के इस्तेमाल को भी तेजी से प्रभावित कर रहा है।