नई दिल्ली .... इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि लोग यह समझते हैं कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कहने पर काम करते हैं, लेकिन यह सच नहीं है। यरुशलम में आयोजित एक समिट में बोलते हुए नेतन्याहू ने कहा, ‘अमेरिका में लोग कहते हैं कि राष्ट्रपति ट्रम्प वही करते हैं जो मैं उनसे कहता हूं। वहीं इजराइल में कुछ लोग सोचते हैं कि मैं वही करता हूं जो ट्रम्प चाहते हैं। लेकिन दोनों ही बातें गलत हैं। ‘
इजराइली पीएम ने कहा कि इजराइल और अमेरिका करीबी सहयोगी जरूर हैं, लेकिन दोनों देशों के अपने-अपने हित हैं और हर मुद्दे पर उनकी राय एक जैसी नहीं होती। नेतन्याहू ने दोहराया कि इजराइल, ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इस पर कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक जरूरत महसूस होगी तब तक इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान में रहेगी। इस बीच स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत दूसरे दिन शुरू हो गया है। पहला दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के तीखे बयानों की वजह से तनावपूर्ण रहा था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता सफल रही। शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि दोनों पक्ष अगले 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप पर सहमत हुए हैं। इसके अलावा राजनीतिक स्तर पर निगरानी के लिए एक हाई-लेवल कमेटी बनाने और आगे तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू करने का भी फैसला हुआ है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान शांति और स्थायी समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाता रहेगा। ईरानी न्यूज एजेंसी तस्नीम ने सोमवार को दावा किया कि स्विट्जरलैंड में अब तक ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं हुई है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (ढ्ढक्रत्रष्ट) से जुड़ी एजेंसी ने ईरानी डेलिगेशन टीम के करीबी सूत्र के हवाले से यह दावा किया है। अमेरिका, ईरान, कतर और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों की स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में पहली बैठक हुई। सभी पक्षों ने कहा कि बातचीत सकारात्मक रही और कुछ प्रगति हुई है।
60 दिन में अंतिम समझौते की कोशिश : दोनों देशों ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौता करने का टारगेट तय किया है। इसके लिए एक रोडमैप तैयार कर ली गई है। पहली बैठक में बड़े राजनीतिक मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश हुई। अब परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और दूसरे तकनीकी मुद्दों पर विशेषज्ञों की अलग-अलग टीमें विस्तार से बातचीत करेंगी।
बातचीत की निगरानी के लिए नई कमेटी बनेगी : एक हाई लेवल कमेटी बनाई जाएगी, जो पूरी वार्ता प्रक्रिया पर नजर रखेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़े। दोनों देशों के मुख्य वार्ताकार नियमित रूप से इस कमेटी को जानकारी देंगे। दोनों देशों के बीच एक सीधा संपर्क तंत्र (हॉटलाइन जैसी व्यवस्था) बनाया जाएगा। अगर कोई तनाव या गलतफहमी पैदा होती है तो दोनों पक्ष सीधे बात कर सकेंगे।
होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा पर जोर : हॉटलाइन जैसी व्यवस्था बनाने का एक बड़ा मकसद यह भी है कि होर्मुज से गुजरने वाले तेल और व्यापारिक जहाज सुरक्षित रहें और किसी टकराव का शिकार न हों। लेबनान में संघर्ष दोबारा न बढ़े, इसके लिए एक डी-कॉन्फि्लक्शन सेल बनाया जाएगा। यह व्यवस्था युद्धविराम के पालन पर नजर रखेगी और किसी भी तनाव को बढ़ने से रोकने की कोशिश करेगी। बयान में साफ कहा गया है कि पूरे सप्ताह बर्गेनस्टॉक में तकनीकी स्तर की वार्ताएं जारी रहेंगी।